सांकरी मसूरी से करीब 200 किलोमीटर की दूरी पर करीब 300 साल पुरानी घाटी में स्थित छोटा सा किंतु बेहद खूबसूरत गांव ट्रैक प्रेमियों के लिए मानो स्वर्ग का द्वार है । कहते हैं यहाँ पर्शियन और ग्रीक सहित दुनिया भर की वंशावली है। 220 से 230 परिवारों में करीब 22 परिवार ओशो सन्यासी को मानने वाले हैं । यह टोंस नदी से लगा हुआ है । सांकरी से करीब 15 किलोमीटर आगे जखोल के पास ही टोंस नदी का उद्गम स्थल है ।
साहसिक चढ़ाई, बर्ड वाचिंग, पहाड़ी ग्राम्य जीवन का अनुभव करना, या होम स्टे करना हो तो सांकरी सर्वोत्तम है । कुछ लोग तो इसे होम स्टे गाँव भी कहते हैं । सांकरी का मुख्य व्यवसाय सेब तथा राजमा की खेती करना है । इसके अलावा आलू, धान, गेहूं और मडुआ की उपज भी होती है लेकिन जबसे युवाओं में ट्रैकिंग का क्रेज बढ़ा है लोगों ने इसे भी व्यवसाय के रूप में अपना लिया है ।
पढ़ाई के साधनों का देखें तो १२ वीं तक के सरकारी स्कूल हैं यहाँ लेकिन इतनी दूर दराज की पोस्टिंग पर एक तो कोई आना नहीं चाहता दूसरे आता भी है तो जल्दी ही ट्रांसफर लेना चाहता है । पढ़ाई की इस सुविधा और असुविधा के बीच जिन घरों की आय ठीक ठाक है वे बच्चों को आगे की पढाई के लिए पुरोला, जो करीब ५७ किलोमीटर है या देहरादून, जो २३० किलोमीटर है, भेजते हैं वरना १२ वीं के बाद वे अपने पुस्तैनी काम में लग जाते हैं ।
सांकरी को ट्रैकिंग का हब भी कहते हैं क्योंकि तमाम सारे ट्रैकिंग जैसे केदारकंठा, हर की दून, बाली पास, फुलारा रिज, रुपिन पास, रुन्स्यारा लेक, देव क्यारा बुग्याल, लेखा टॉप, विजय टॉप आदि के रूट यहीं से शुरू होते हैं । यह ट्रैक उत्तराखंड के गोविन्द वन्य जीव अभ्यारण और राष्ट्रीय उद्द्यान में स्थित है जिसके लिए वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है । इसके लिए शुल्क प्रति व्यक्ति १५० रुपये है । किसी ट्रैकिंग एजेंसी के साथ जाने में ये सुविधा होती है कि ये अनुमति वगैरह की जिम्मेदारी उनकी होती है । वैसे भी बिना गाइड लिये अकेले वहां जाने की अनुमति नहीं है । गाइड वहाँ आसानी से मिल जाते है जो 1200 से 1500 सौ रुपये प्रति ट्रेक चार्ज करते हैं उसमें समान ढोने वाले पॉटर का किराया शामिल नही है । इसके साथ ही ट्रेकिंग से संबंधित सामान भी यहां किराए पर मिलते है । इस क्षेत्र की एक ख़ास बात ये है कि सर्दियों में जब पूरे उत्तराखंड का सीजन बंद होता है, सांकरी का सीजन शुरू होता है । यह गाँव सर्दियों की ट्रैकिंग के लिए विशेष रूप से जाना जाता है ।



भारती जी मेरे जन्मस्थान और मेरे गाँव पुरोला, गुन्दियाट गाँव के समीप........ कब गये थे जी आप?
जवाब देंहटाएंDecember january 2020-2021
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